Rituparna Roy

Marriage & Compatibility

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मंगल दोष क्या है? प्रभाव, उपाय और विवाह पर असर

By Rituparna Roy··4 min read

मंगल दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली के पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल ग्रह स्थित हो। इसे मांगलिक दोष, कुज दोष या भौम दोष भी कहते हैं। हालाँकि इसका असर पूरी कुंडली पर निर्भर करता है और अक्सर इसे ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर देखा जाता है।

मंगल दोष कैसे बनता है? मंगल एक तेज़ और ऊर्जावान ग्रह है। जब यह विवाह, घर और आयु से जुड़े भावों में बैठता है, तो शास्त्र इसे मंगल दोष मानते हैं। इसे केवल लग्न से नहीं, बल्कि चंद्र और शुक्र से भी देखा जाता है — तीनों में से किसी में भी दोष न हो तभी व्यक्ति पूर्ण रूप से गैर-मांगलिक माना जाता है।

विवाह पर असर परंपरागत रूप से मंगल दोष को वैवाहिक जीवन में मतभेद, देरी या स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जोड़ा जाता है। लेकिन इनमें से कई परिणाम सशर्त होते हैं और कुंडली के अन्य कारकों से रद्द हो जाते हैं। मांगलिक होना अशुभ विवाह की गारंटी नहीं है — यह सबसे आम भ्रांति है।

मंगल दोष कब रद्द होता है? कई मान्य दोष-भंग नियम हैं। जब दोनों साथी मांगलिक हों, जब मंगल अपनी राशि या उच्च का हो, जब गुरु जैसे शुभ ग्रह की दृष्टि हो, या कुछ विशेष भाव-राशि संयोग हों — तब मंगल दोष निष्प्रभावी माना जाता है।

आसान उपाय जहाँ दोष सच में सक्रिय हो, वहाँ उपायों में शामिल हो सकते हैं — किसी अन्य मांगलिक साथी से विवाह, हनुमान चालीसा या मंगल मंत्र का जाप, मंगलवार का व्रत, दान, या कुंडली विश्लेषण के बाद सुझाया गया रत्न। उपाय हमेशा कुंडली के अनुसार ही करें, सामान्य नहीं।

अपनी कुंडली दिखाएँ अगर किसी रिश्ते में मंगल दोष को लेकर चिंता है, तो डर से बेहतर है सही विश्लेषण। रितुपर्णा रॉय जाँचती हैं कि दोष वास्तव में सक्रिय है या रद्द हो चुका है, और क्या उपाय ज़रूरी है। अपनी जन्म जानकारी व्हाट्सएप पर भेजकर परामर्श बुक करें।

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